जयपुर। ऎसा नहीं है कि सारे विकल्प सिर्फ साइंस में ही हैं, आर्ट्स के सब्जेक्ट्स की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स भी कॅरियर बना सकते हैं।
बीच में एक दौर ऎसा आया था, जब माना जाता था कि जिसका मन पढ़ाई में नहीं लगता, वे लोग ही आट्र्स स्ट्रीम के सब्जेक्ट्स चुनते हैं। आज बहुत से लोग अपनी पसंद से आट्र्स स्ट्रीम का चयन करते हैं। अपनी पसंद से इस स्ट्रीम के चयन के पीछे दो मुख्य कारण हैं- पहला कि इससे वे अपनी पसंद के कॅरियर या हॉबी पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं। दूसरा वे कंपीटिटिव एग्जाम की तैयारी कर पाते हैं।
आट्र्स के सब्जेक्ट्स के साथ जुड़े विभिन्न अवसरों के चलते यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स के लिए मजबूरी नहीं बल्कि एक खास पसंद बन गई है। इस क्षेत्र से जुड़कर वे अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
तैयारी का समय
साइंस कोर्सेज करने वाले स्टूडेंट्स को ग्रेजुएशन के दौरान थ्योरी के साथ-साथ लैब्स में भी पर्याप्त समय बिताना होता है, यही स्थिति कॉमर्स स्टूडेंट्स की है क्योकि उन्हें भी कोचिंग आदि की मदद लेनी पड़ती है। आट्र्स स्टूडेंट्स को कोचिंग या लैब्स में अपना समय नहीं लगाना पड़ता और वे अपना यह बचा हुआ समय किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगा सकते हैं और सफल हो सकते हैं।
आसानी से प्रवेश
अपनी पसंद से आट्र्स सब्जेक्ट्स चुनने वालों को एक फायदा यह भी रहता है कि उन्हें साइंस या कॉमर्स कोर्सेज की तरह प्रवेश में ज्यादा मारा-मारी नहीं होती। बाकी कोर्सेज की तुलना में उन्हें थोड़ी सरलता से प्रवेश मिल जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत देश की नामी यूनिवर्सिटीज में आट्र्स की कट-ऑफ तुलनात्मक रूप से कम रहती है। इसलिए प्रवेश आसानी से मिल जाता है।
हॉबी कम कॅरियर
आट्र्स स्टूडेंट्स के पास अपनी हॉबीज को कॅरियर के रूप में विकसित करने का भी पर्याप्त समय होता है। यह हॉबी सिंगिंग, डांसिंग, म्यूजिक, सोशल वर्क, टीचिंग, कुकिंग, डिजाइनिंग कोई भी हो सकती है।
अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई और हॉबी में बैलेंस रखकर आप अपने लिए एक विकल्प तैयार कर सकते हैं।
प्रोफेशनल कोर्स
आट्र्स में ग्रेजुएशन के साथ आप अपनी पसंद का प्रोफेशनल कोर्स भी कर सकते हैं। यहां बताए जा रहे कुछ कोर्सेज आजकल खास डिमांड में हैं- ड्रेस डिजाइनिंग, रेडियो जॉकी, जर्नलिज्म, ब्यूटीशियन, लैंग्वेज कोर्स, क्रिएटिव राइटिंग, एनिमेशन आदि। ये कोर्स आपके लिए कॅरियर का विकल्प तैयार करते हैं।
बीच में एक दौर ऎसा आया था, जब माना जाता था कि जिसका मन पढ़ाई में नहीं लगता, वे लोग ही आट्र्स स्ट्रीम के सब्जेक्ट्स चुनते हैं। आज बहुत से लोग अपनी पसंद से आट्र्स स्ट्रीम का चयन करते हैं। अपनी पसंद से इस स्ट्रीम के चयन के पीछे दो मुख्य कारण हैं- पहला कि इससे वे अपनी पसंद के कॅरियर या हॉबी पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं। दूसरा वे कंपीटिटिव एग्जाम की तैयारी कर पाते हैं।
आट्र्स के सब्जेक्ट्स के साथ जुड़े विभिन्न अवसरों के चलते यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स के लिए मजबूरी नहीं बल्कि एक खास पसंद बन गई है। इस क्षेत्र से जुड़कर वे अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
तैयारी का समय
साइंस कोर्सेज करने वाले स्टूडेंट्स को ग्रेजुएशन के दौरान थ्योरी के साथ-साथ लैब्स में भी पर्याप्त समय बिताना होता है, यही स्थिति कॉमर्स स्टूडेंट्स की है क्योकि उन्हें भी कोचिंग आदि की मदद लेनी पड़ती है। आट्र्स स्टूडेंट्स को कोचिंग या लैब्स में अपना समय नहीं लगाना पड़ता और वे अपना यह बचा हुआ समय किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगा सकते हैं और सफल हो सकते हैं।
आसानी से प्रवेश
अपनी पसंद से आट्र्स सब्जेक्ट्स चुनने वालों को एक फायदा यह भी रहता है कि उन्हें साइंस या कॉमर्स कोर्सेज की तरह प्रवेश में ज्यादा मारा-मारी नहीं होती। बाकी कोर्सेज की तुलना में उन्हें थोड़ी सरलता से प्रवेश मिल जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत देश की नामी यूनिवर्सिटीज में आट्र्स की कट-ऑफ तुलनात्मक रूप से कम रहती है। इसलिए प्रवेश आसानी से मिल जाता है।
हॉबी कम कॅरियर
आट्र्स स्टूडेंट्स के पास अपनी हॉबीज को कॅरियर के रूप में विकसित करने का भी पर्याप्त समय होता है। यह हॉबी सिंगिंग, डांसिंग, म्यूजिक, सोशल वर्क, टीचिंग, कुकिंग, डिजाइनिंग कोई भी हो सकती है।
अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई और हॉबी में बैलेंस रखकर आप अपने लिए एक विकल्प तैयार कर सकते हैं।
प्रोफेशनल कोर्स
आट्र्स में ग्रेजुएशन के साथ आप अपनी पसंद का प्रोफेशनल कोर्स भी कर सकते हैं। यहां बताए जा रहे कुछ कोर्सेज आजकल खास डिमांड में हैं- ड्रेस डिजाइनिंग, रेडियो जॉकी, जर्नलिज्म, ब्यूटीशियन, लैंग्वेज कोर्स, क्रिएटिव राइटिंग, एनिमेशन आदि। ये कोर्स आपके लिए कॅरियर का विकल्प तैयार करते हैं।
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